*पंचायत सहायकों के साथ सरकार का सौतेला व्यवहार, मनरेगा मजदूरों से भी कम मानदेय पर चार गुना काम**

**उत्तर प्रदेश के पंचायत सहायकों में भारी नाराजगी, सरकार से मानदेय वृद्धि और सुविधाओं की मांग तेज**


प्रदेश भर में कार्यरत पंचायत सहायकों के बीच सरकार के प्रति गहरा आक्रोश देखने को मिल रहा है। पंचायत सहायकों का कहना है कि उनसे लगातार **देहाड़ी मजदूरों और मनरेगा मजदूरों से भी कम मानदेय** पर काम लिया जा रहा है, जबकि उनके जिम्मे कार्य का बोझ कई गुना अधिक है।


पंचायत सहायकों का आरोप है कि सरकार उन्हें केवल **“डाटा एंट्री ऑपरेटर”** के नाम पर नियुक्त करती है, लेकिन हकीकत यह है कि उनसे केवल कंप्यूटर पर बैठकर डाटा भरने का काम नहीं, बल्कि **फील्ड में जाकर घर-घर सर्वे, दस्तावेज़ सत्यापन, ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोडिंग, योजनाओं का रिकॉर्ड संधारण, ग्रामीणों की समस्याओं का निस्तारण, पंचायत कार्यालय का नियमित संचालन** जैसे तमाम कार्य करवाए जाते हैं।

 **ऑनलाइन काम, फील्ड का दबाव, लेकिन संसाधन शून्य**


पंचायत सहायकों का कहना है कि आज के समय में पंचायत से जुड़े लगभग सभी कार्य **पूरी तरह ऑनलाइन** हो चुके हैं। इसके बावजूद सरकार ने पंचायत सहायकों को न तो **सरकारी मोबाइल**, न **टैबलेट**, और न ही पर्याप्त तकनीकी संसाधन उपलब्ध कराए हैं।


ऐसी स्थिति में पंचायत सहायकों को मजबूरी में अपने **निजी मोबाइल, इंटरनेट, लैपटॉप/कंप्यूटर और अन्य संसाधनों** का इस्तेमाल करना पड़ता है। इतना ही नहीं, फील्ड में बार-बार गांवों में जाकर कार्य करने के बावजूद उन्हें **यातायात भत्ता** तक नहीं दिया जाता।


**काम चार गुना, वेतन सबसे कम**


पंचायत सहायकों का कहना है कि उनसे लिया जाने वाला काम **नरेगा मजदूरों की तुलना में चार गुना अधिक** है। जहां मनरेगा मजदूरों को उनके श्रम का उचित भुगतान मिलता है, वहीं पंचायत सहायकों को तकनीकी, प्रशासनिक और फील्ड—तीनों प्रकार का काम करने के बावजूद बेहद कम मानदेय दिया जा रहा है।


उनका कहना है कि सरकार ने समय-समय पर कई विभागों और कर्मचारियों के **वेतन एवं मानदेय में वृद्धि** की है, लेकिन पंचायत सहायकों के मामले में लगातार **अनदेखी** की गई है। इससे पंचायत सहायकों में खुद को **उपेक्षित और शोषित** महसूस करने की भावना बढ़ती जा रही है।


### **सरकार से पंचायत सहायकों की प्रमुख मांगें**


पंचायत सहायकों ने सरकार से मांग की है कि—


* पंचायत सहायकों का **मानदेय तत्काल बढ़ाया जाए**

* उन्हें उनके कार्यभार के अनुसार **स्थायी कर्मचारी का दर्जा** दिया जाए

* सभी पंचायत सहायकों को **सरकारी मोबाइल/टैबलेट और इंटरनेट सुविधा** उपलब्ध कराई जाए

* फील्ड कार्य के लिए **यात्रा भत्ता** दिया जाए

* पंचायत सहायकों के कार्य की स्पष्ट **भूमिका और अधिकार** तय किए जाएं

* लगातार बढ़ते कार्यभार के अनुरूप **सम्मानजनक वेतन संरचना** लागू की जाए


 **आक्रोश बढ़ा, आंदोलन की चेतावनी**


पंचायत सहायकों का कहना है कि यदि सरकार ने जल्द उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया, तो वे मजबूर होकर **विरोध प्रदर्शन, धरना और बड़े स्तर पर आंदोलन** करने के लिए बाध्य होंगे।


पंचायत सहायकों ने साफ कहा है कि वे गांवों में सरकार की योजनाओं को धरातल तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन सरकार उन्हीं कर्मचारियों के साथ **सौतेला व्यवहार** कर रही है।


### **“सम्मान नहीं, तो काम कैसे?”**


पंचायत सहायकों का कहना है कि वे ग्रामीण विकास की रीढ़ हैं। पंचायत से जुड़ी योजनाओं का डिजिटल क्रियान्वयन, रिकॉर्ड प्रबंधन, लाभार्थियों का सत्यापन और ऑनलाइन रिपोर्टिंग जैसे महत्वपूर्ण कार्य उन्हीं के भरोसे चल रहे हैं। बावजूद इसके, उन्हें न उचित वेतन मिल रहा है, न संसाधन और न ही सम्मान।


अब पंचायत सहायकों की एक ही मांग है—

**“हमारा शोषण बंद करो, काम के अनुसार सम्मानजनक मानदेय दो।”**

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