सिंगाही खीरी। ग्राम पंचायत सिंगहा कला में करीब साढ़े आठ एकड़ जमीन पर आज तक शुरू नही हुआ डिग्री कालेज का निर्माण

 पंचायत वासियों का सहयोग और प्रधानप्रतिनिधि श्याम मोहन दीक्षित की मेहनत से महाविद्यालय के कार्य को मिली नई गति।

संपादक विमलेश कुमार मौर्या

सुप्रीम कोर्ट ने जिला कलेक्टर को तथ्य जांच कर आवश्यक कार्यवाही के लिए किया निर्देशित।

सिंगाही खीरी। ग्राम पंचायत सिंगहा कला में करीब साढ़े आठ एकड़ जमीन पर आज तक शुरू नही हुआ डिग्री कालेज का निर्माण जबकि न्यायालय ने 2012 में पंडित दीन दयाल उपाध्याय क्रेन ग्रोवर्स महाविद्यालय समिति को डिग्री कॉलेज बनाने के लिए आदेश दिया था। आदेश के दो साल बाद 2014 में कोर्ट को गुमराह किया गया कि महाविद्यालय प्रस्तावित जमीन पर चल रहा है, जबकि सच्चाई यह है कि वहां किसी प्रकार का कोई भी विद्यालय बना ही नही। महाविद्यालय न होने के कारण तराई  इलाके के बच्चे जो दूर दराज नही जा पाते वो उच्च शिक्षा से आज भी वंचित है, जिसको लेकर प्रधानप्रतिनिधि श्याम मोहन दीक्षित ने हाईकोर्ट में सन्तराम कनौजिया बनाम सरकार के नाम रिट याचिका दायर की महाविद्यालय की भूमि ग्राम पंचायत को वापस मिल जाये जिससे एक नई समिति का गठन कर महाविद्यालय के नाम आवंटित पैसे का खोजबीन कर उसका निर्माण आमजन के सहयोग से कराया जा सके जिससे तराई क्षेत्र के बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए इधर उधर भटकना न पड़े, लेकिन किन्ही कारणों के चलते हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया। हाईकार्ट से याचिका खारिज होने के बाद कार्यवाही को आगे बढाते हुए प्रधानप्रतिनिधि ने रिट याचिका सुप्रीम कोर्ट में की जहां पर 27 जनवरी 2026 को कोर्ट ने सुनवाई करते हुए उत्तर प्रदेश राज्य का हस्तक्षेप कर लखीमपुर खीरी डीएम के माध्यम से तथ्य जांच कर आवश्यक कार्यवाही चार माह की अवधि के पहले करने को लेकर निर्देशित किया। 

बताते चले कि ग्राम पंचायत सिंगहा कला में सन 1980 ई.में सरजू सहकारी चीनी मिल लिमिटेड के उपाध्यक्ष स्व.प्रीतम सिंह दुग्गा की अध्यक्षता में सरजू किसान महाविद्यालय के निर्माण का प्रस्ताव पास हुआ था और ग्राम पंचायत में करीब साढ़े आठ एकड़ जमीन महाविद्यालय समिति को प्रस्तावित की थी और सरजू महाविद्यालय के नाम से बेलरायां चीनी मिल में किसानों से डिग्री कालेज के निर्माण के लिए दस पैसे की किसानों से प्रति कुंतल के हिसाब से की गई, कटौती से करोणों रुपया एकत्रित हुआ था, तत्कालीन जिलाधिकारी विजय शंकर पांडेय ने शिलान्यास की तिथि घोषित कर पत्थर भी लग गया था, लेकिन उनका स्थानांतरण होने के बाद शिलान्यास नही हो सका। पंडित दीन दयाल उपाध्यक्ष क्रेन गोवर्ष महाविद्यालय के नाम दूसरी समिति बनाकर तत्कालीन प्रधान दुर्गा प्रसाद से प्रस्ताव कर लिया और मामला न्यायालय में विचाराधीन हो गया और डिग्री कॉलेज का निर्माण अधर में लटक गया।सरजू किसान महाविद्यालय के उपाध्यक्ष के स्वर्गवास के बाद दोनों समितियां सन 2011 में समझौता होकर डिग्री कॉलेज बनाने का एकपक्षीय आदेश पंडित दीनदयाल उपाध्याय क्रेन गोवर्स महाविद्यालय के नाम हो गया। लेकिन किसानों से कटौती किये गये पैसे का खुर्द बुर्द हो जाने के बाद जब धन समिति को नहीं मिला तो पंडित दीनदयाल उपाध्याय क्रेन गोवर्स महाविद्यालय समिति ने डिग्री कॉलेज निर्माण से अपने हांथ खड़े कर दिए। लेकिन कागजो में 2014 से अब तक पंडित दीनदयाल उपाध्याय क्रेन गोवर्ष महाविद्यालय के नाम से विद्यालय चल रहा है,लेकिन विद्यालय का कहीं अता पता नही है,इस संदर्भ में प्रधानप्रतिनिधि श्याम मोहन दीक्षित ने पंचायत में बैठकों का दौर प्रारम्भ करते हुए कार्यवाही को आगे बढ़ाते गए जिसका नतीजा ये निकला कि सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार के हस्तक्षेप कर जिला जिलाधिकारी को जांच कर चार माह के अंदर रिपोर्ट देने को लेकर निर्देशित किया। बैठक में प्रधान प्रतिनिधि राम मोहन दीक्षित, संकटा प्रसाद मौर्य, ज्ञान प्रकाश शुक्ला,प्रयाग दत्त शास्त्री,मुनेश प्रसाद शुक्ला, रामसनेही वर्मा,दीपक, सहित सैकड़ों ग्राम के सम्भ्रांत लोग मौजूद रहे।

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